FOIR क्या है?
FOIR का पूरा नाम Fixed Obligation to Income Ratio है। यह आपकी मासिक आय का वह हिस्सा है जो तय भुगतानों, मुख्य रूप से EMI, में जाता है। लेंडर इससे आँकते हैं कि आप एक और लोन आराम से सँभाल पाएँगे या नहीं।
FOIR = (मौजूदा देनदारियाँ + नई EMI) ÷ मासिक आय × 100
एक छोटा उदाहरण
मान लीजिए आपकी सैलरी ₹60,000 है। आप ₹8,000 की EMI देते हैं और ₹20,000 का क्रेडिट कार्ड बकाया है, जिसे लेंडर आमतौर पर 5%, यानी ₹1,000 प्रति माह गिनते हैं। आप ₹15,000 की EMI वाला नया लोन चाहते हैं।
आपकी देनदारियाँ कुल ₹24,000 होंगी, इसलिए आपका FOIR ₹24,000 ÷ ₹60,000 = 40% है। इस आय पर पर्सनल लोन की सीमा 50% यानी ₹30,000 प्रति माह है। मौजूदा ₹9,000 की देनदारियों के बाद आपके पास ₹21,000 तक की नई EMI की गुंजाइश है।
लेंडर कितने FOIR की अनुमति देते हैं?
सीमा आमतौर पर आय के साथ बढ़ती है, क्योंकि ज़्यादा कमाने वाले के पास रोज़मर्रा के खर्च के बाद ज़्यादा पैसा बचता है। इस पेज और हमारे पात्रता कैलकुलेटर में यही सीमाएँ ली गई हैं।
| मासिक आय | पर्सनल | कार / बिज़नेस | होम / LAP |
|---|---|---|---|
| ₹30,000 से कम | 40% | 45% | 50% |
| ₹30,000 से ₹74,999 | 50% | 55% | 60% |
| ₹75,000 से ₹1,49,999 | 60% | 65% | 70% |
| ₹1.5 लाख और उससे ऊपर | 65% | 70% | 75% |
ये आम मानक हैं, पक्के नियम नहीं। कुछ NBFC 80% तक जा सकते हैं, आमतौर पर ज़्यादा दर पर, और हर लेंडर आय और देनदारियों को अलग तरह से गिन सकता है।
और जानना चाहते हैं? पूरी गाइड पढ़ें: FOIR क्या है और इसे कैसे घटाएँ।